॥ तापवाणी ज्योतिष ॥

सत्यम् वद धर्मम् चर

गणना जारी...

रोहिणी नक्षत्र 🌕

"भगवान श्री कृष्ण की जन्म ऊर्जा, चंद्रमा की पटरानी और भौतिक समृद्धि का सर्वोच्च शिखर"

नक्षत्र स्वामी

चंद्रमा (Moon)

अधिपति देवता

ब्रह्मा (Creator)

राशि / तत्व

वृषभ / पृथ्वी

योनि / गण

सर्प / मनुष्य

प्रतीक

बैलगाड़ी / रथ

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१. रोहिणी: ब्रह्मांड का सबसे सुंदर तारा

रोहिणी नक्षत्र आकाश मंडल का चौथा नक्षत्र है। खगोल विज्ञान में इसे 'एल्डेबरन' (Aldebaran) कहा जाता है, जो वृषभ राशि का सबसे चमकदार और लाल तारा है। यह तारा इतना सम्मोहक है कि इसे प्राचीन काल से ही 'सौंदर्य की देवी' के रूप में पूजा जाता रहा है।

श्री कृष्ण का नक्षत्र: इस नक्षत्र की सबसे बड़ी पहचान यह है कि साक्षात भगवान श्री कृष्ण का जन्म इसी रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। चंद्रमा का इस नक्षत्र से विशेष प्रेम श्री कृष्ण के चुंबकीय व्यक्तित्व और उनकी १६ कलाओं में स्पष्ट झलकता है। रोहिणी जातक स्वभाव से ही आकर्षक, कलाप्रेमी और मधुरभाषी होते हैं।

सृजन का आधार: इसके देवता ब्रह्मा जी हैं। ब्रह्मा जी सृष्टि के रचयिता हैं, इसीलिए रोहिणी नक्षत्र में सृजन (Creativity), विकास और विस्तार की अपार शक्ति होती है। यह नक्षत्र जीवन में कभी कमी (Lack) महसूस नहीं होने देता।

॥ चारों चरणों का आध्यात्मिक फल ॥

प्रथम चरण (मेष नवांश)

स्वामी: मंगल | ऊर्जा: भौतिक इच्छा

यह चरण जातक को साहसी और महत्वाकांक्षी बनाता है। जातक अपने सुख-साधनों के लिए बहुत अधिक परिश्रम करता है और सफल होता है।

द्वितीय चरण (वृषभ नवांश)

स्वामी: शुक्र | ऊर्जा: पुष्कर नवांश

परम शुभ चरण / श्री कृष्ण की ऊर्जा

यह नक्षत्र का सबसे शक्तिशाली हिस्सा है। यहाँ जातक को राजसी सुख, अपार धन और शारीरिक सौंदर्य प्राप्त होता है।

तृतीय चरण (मिथुन नवांश)

स्वामी: बुध | ऊर्जा: बौद्धिक चातुर्य

यहाँ चंद्रमा और बुध का मेल होता है। जातक व्यापार, संगीत और गणित में निपुण होता है। इनकी वाणी बहुत प्रभावशाली होती है।

चतुर्थ चरण (कर्क नवांश)

स्वामी: चंद्रमा | ऊर्जा: अत्यधिक भावुकता

यहाँ जातक अपनी माता के बहुत करीब होता है। जातक में दूसरों के प्रति ममता और पोषण का भाव कूट-कूट कर भरा होता है।

३. करियर एवं आर्थिक समृद्धि

लक्जरी एवं फैशन

फैशन डिजाइनिंग, मॉडलिंग, फिल्म उद्योग और कॉस्मेटिक्स व्यापार में ये जातक शिखर पर होते हैं।

ज्वेलरी एवं कला

हीरे-जवाहरात का व्यापार, चित्रकला और संगीत निर्देशन इनके लिए सर्वश्रेष्ठ करियर विकल्प हैं।

डेयरी एवं कृषि

दूध से बने उत्पादों, आधुनिक खेती और बच्चों के उत्पादों के व्यापार में अपार लाभ मिलता है।

४. विवाह एवं नक्षत्र मिलान (Compatibility)

श्रेणीअनुकूल नक्षत्र
अति श्रेष्ठ (Perfect)मृगशिरा, पुनर्वसु, चित्रा
अनुकूल (Good)भरणी, हस्त, श्रवण, अनुराधा
चुनौतीपूर्ण (Difficult)अश्विनी, उत्तराषाढ़ा, मघा

५. नक्षत्र वृक्ष: जामुन (Black Plum)

रोहिणी नक्षत्र का पवित्र आराध्य वृक्ष जामुन है। शास्त्रों के अनुसार, जामुन के वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाना और उसे घर की उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना रोहिणी जातक के लिए कुबेर का खजाना खोलने जैसा है।

"यदि चंद्रमा कमजोर है, तो जामुन की लकड़ी को सफेद धागे में गले में धारण करें। इससे मानसिक शांति और आर्थिक स्थिरता आती है।"

[रोहिणी नक्षत्र वृक्ष - जामुन का चित्र]

॥ रोहिणी नक्षत्र महा-उपचार ॥

🕯️ शिव वंदना: सोमवार को शिव जी पर गंगाजल और कच्चा दूध अर्पित करें, यह रोहिणी की ऊर्जा को शुद्ध करता है।

🥛 सफेद दान: चावल, चीनी और चांदी का दान आपके शुक्र और चंद्रमा को अत्यंत बलवान बनाता है।

🕉️ बीज मंत्र: "ॐ ऋं" या "ॐ रोहिणी नक्षत्राय नमः" का नियमित १०८ बार जाप करें।

💎 रत्न विज्ञान: ५.२५ रत्ती का असली दक्षिण समुद्र का मोती चांदी की अंगूठी में धारण करें।