पुष्य नक्षत्र 👑
"नक्षत्रों का राजा, पोषण का महा-स्रोत और वह समय जिसमें किया गया दान अक्षय बन जाता है।"
स्वामी ग्रह
शनि (Saturn)
अधिपति देवता
बृहस्पति (Jupiter)
प्रतीक
गाय का थन / फूल
राशि
कर्क (Cancer)
१. पुष्य नक्षत्र: पोषण और संपन्नता की जड़ें
पुष्य नक्षत्र को ज्योतिष शास्त्र में 'तिष्य' (Auspicious) भी कहा गया है। यह पूरी तरह से कर्क राशि में स्थित है। खगोल विज्ञान में इसे 'डेल्टा कैनकरी' (Delta Cancri) के नाम से जाना जाता है। पुष्य का अर्थ है "पोषण करने वाला" या "शक्ति देने वाला"।
अधिपति देवता बृहस्पति: पुष्य के देवता देवताओं के गुरु बृहस्पति हैं। चूँकि गुरु ज्ञान, नैतिकता और धर्म के कारक हैं, इसलिए पुष्य नक्षत्र के जातकों में जन्मजात नेतृत्व क्षमता और धार्मिक प्रवृत्ति होती है। शनि स्वामी होने के कारण इसमें अनुशासन और गुरु अधिपति होने के कारण इसमें विस्तार (Expansion) की अद्भुत शक्ति है।
गाय का थन (प्रतीक): इसका प्रतीक "गाय का थन" है, जो निस्वार्थ सेवा और पोषण का संकेत देता है। जैसे गाय का दूध सभी के लिए लाभकारी है, वैसे ही पुष्य नक्षत्र के जातक समाज के लिए अत्यंत उपयोगी और परोपकारी सिद्ध होते हैं।
॥ पुष्य के चार चरणों का फल ॥
प्रथम चरण (सिंह नवांश)
स्वामी: सूर्य | राशि: कर्क
यह चरण जातक को राजसी सुख और मान-सम्मान दिलाता है। जातक अपने परिवार का नाम रोशन करने वाला और नेतृत्व करने वाला होता है।
द्वितीय चरण (कन्या नवांश)
स्वामी: बुध | राशि: कर्क
यहाँ जातक की बुद्धि बहुत तार्किक होती है। वह व्यापार, हिसाब-किताब और लेखन में निपुण होता है।
तृतीय चरण (तुला नवांश)
स्वामी: शुक्र | राशि: कर्क
यह चरण विलासिता और सौंदर्य का है। जातक कलात्मक होता है और सुख-सुविधाओं से भरा जीवन व्यतीत करता है।
चतुर्थ चरण (वृश्चिक नवांश)
स्वामी: मंगल | राशि: कर्क
यह सबसे खोजी और तीव्र चरण है। जातक गुप्त विद्याओं, आध्यात्मिकता और निडरता के लिए जाना जाता है।
३. करियर: शनि का अनुशासन और गुरु का लाभ
व्यापार एवं सोना
ज्वेलरी, कीमती धातु और बड़े व्यापारिक घरानों में ये जातक बहुत सफल होते हैं।
सरकारी एवं न्यायिक
मंत्री, सलाहकार, न्यायाधीश (Judge) और ऊँचे सरकारी पदों के लिए यह नक्षत्र बना है।
सामाजिक एवं धार्मिक
एनजीओ चलाने वाले, ट्रस्टी और धार्मिक संस्थानों के प्रमुख इसी नक्षत्र के होते हैं।
४. पुष्य नक्षत्र में खरीदारी क्यों करें?
लोकप्रिय ज्योतिष में पुष्य नक्षत्र को "स्वर्ण खरीदारी" के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इसके पीछे का रहस्य यह है कि पुष्य नक्षत्र चिरस्थायित्व (Durability) प्रदान करता है।
- इस समय खरीदी गई वस्तु अक्षय (अविनाशी) होती है।
- नया व्यापार शुरू करने के लिए यह सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है।
- बृहस्पति का प्रभाव होने के कारण यह विद्यारंभ (पढ़ाई शुरू करना) के लिए भी उत्तम है।
५. पवित्र वृक्ष: पीपल (The Sacred Bodhi)
पुष्य नक्षत्र का पवित्र वृक्ष पीपल (Peepal) है। पीपल को "वृक्षों का राजा" कहा जाता है, ठीक वैसे ही जैसे पुष्य नक्षत्रों का राजा है।
॥ पुष्य नक्षत्र के अमोघ उपाय ॥
💎 स्वर्ण दान/क्रय: सामर्थ्य अनुसार थोड़ा सोना खरीदना या दान करना सौभाग्य बढ़ाता है।
🔱 गुरु वंदना: अपने गुरु या पिता तुल्य व्यक्तियों का सम्मान करें, इससे बृहस्पति की अनंत कृपा मिलती है।
🕯️ शनि शांति: पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
🕉️ बीज मंत्र: "ॐ ह्रीं" या "ॐ पुष्याय नमः" का १०८ बार जाप करें।