॥ तापवाणी ज्योतिष ॥

सत्यम् वद धर्मम् चर

गणना जारी...

पुनर्वसु नक्षत्र 🏹

"प्रकाश का पुनः आगमन, मर्यादा पुरुषोत्तम की ऊर्जा और वह बाण जो कभी लक्ष्य नहीं चूकता।"

स्वामी ग्रह

बृहस्पति (Jupiter)

अधिपति देवता

अदिति (Aditi)

प्रतीक

बाणों का तरकस

राशि

मिथुन - कर्क

07

१. पुनर्वसु: पुनः उदय की दिव्य कथा

पुनर्वसु नक्षत्र का अर्थ है "पुनः बसना" या "प्रकाश की वापसी"। खगोल विज्ञान में इसे 'कैस्टर और पोलक्स' (Castor and Pollux) जुड़वां तारों के रूप में जाना जाता है। यह नक्षत्र संकट के बाद मिलने वाली सुरक्षा और शांति का प्रतीक है।

श्री राम का अवतार: भगवान श्री राम का जन्म इसी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में हुआ था। पुनर्वसु जातक में श्री राम जैसी सहनशीलता, मर्यादा और सत्यवादिता के गुण कूट-कूट कर भरे होते हैं। ये लोग समाज में न्याय की स्थापना के लिए जन्म लेते हैं।

अदिति का मातृत्व: इसकी अधिपति देवता अदिति हैं, जिन्हें देवताओं की माता कहा जाता है। वह असीम आकाश और स्वतंत्रता की प्रतीक हैं। इसी कारण पुनर्वसु जातक कभी भी संकुचित सोच नहीं रखते, उनका हृदय विशाल होता है।

॥ चारों चरणों का आध्यात्मिक फल ॥

प्रथम चरण (मेष नवांश)

स्वामी: मंगल | ऊर्जा: साहसी योद्धा

यहाँ जातक में अदम्य साहस होता है। वह अपनी बुद्धि और बल का सही तालमेल बिठाकर लक्ष्यों को प्राप्त करता है।

द्वितीय चरण (वृषभ नवांश)

स्वामी: शुक्र | ऊर्जा: भौतिक समृद्धि

जातक को कला, विलासिता और व्यापार में अपार सफलता मिलती है। वाणी मधुर और आकर्षक होती है।

तृतीय चरण (मिथुन नवांश)

स्वामी: बुध | ऊर्जा: बौद्धिक चातुर्य

लेखन, संचार और पत्रकारिता के लिए यह सर्वश्रेष्ठ चरण है। जातक की बुद्धि बहुत तार्किक और तेज होती है।

चतुर्थ चरण (कर्क नवांश)

स्वामी: चंद्रमा | ऊर्जा: पुष्कर नवांश

मर्यादा पुरुषोत्तम ऊर्जा

यहीं भगवान राम का जन्म हुआ था। यह दया, करुणा और असीमित आध्यात्मिक ऊंचाई का चरण है।

३. करियर: गुरु की दिव्य दृष्टि

शासन एवं न्याय

वकील, जज, राजनीतिज्ञ और उच्च पदस्थ प्रशासनिक अधिकारी (IAS/IPS) के रूप में सफल होते हैं।

शिक्षा एवं परामर्श

प्रोफेसर, सलाहकार, और आध्यात्मिक गुरु के रूप में दुनिया का मार्गदर्शन करते हैं।

नवाचार एवं रिसर्च

कुछ नया बनाने (Innovation) और पुराने को सुधारने में ये माहिर होते हैं।

४. नक्षत्र वृक्ष: बाँस (Bamboo)

पुनर्वसु नक्षत्र का पवित्र वृक्ष बाँस है। बाँस की विशेषता है कि वह तेज हवा में झुक जाता है पर कभी टूटता नहीं, यही पुनर्वसु जातक की लचीली शक्ति है।

  • घर में बाँस (Lucky Bamboo) लगाना पुनर्वसु जातक के लिए धन और शांति लाता है।
  • बृहस्पति को बलवान करने के लिए बाँस के उपवन में समय बिताना शुभ है।
  • इसे घर की पूर्व या उत्तर दिशा में रखना सर्वोत्तम है।

॥ पुनर्वसु महा-निवारण उपाय ॥

🏹 राम रक्षा स्तोत्र: प्रतिदिन पाठ करने से समस्त नकारात्मक शक्तियां नष्ट हो जाती हैं।

💛 गुरु सेवा: गुरुवार को पीले वस्त्र पहनना और चने की दाल का दान करना भाग्योदय करता है।

🤱 अदिति वंदना: अपनी माता का आशीर्वाद लें, इससे इस नक्षत्र की शुभता १० गुना बढ़ जाती है।

🕉️ बीज मंत्र: "ॐ ह्रीं" या "ॐ पुनर्वसु नक्षत्राय नमः" का १०८ बार जाप करें।