मूल नक्षत्र ✨
"ब्रह्मांड की जड़, विनाश की देवी का निवास और वह शून्य जहाँ से सत्य का पुनः जन्म होता है।"
स्वामी ग्रह
केतु (Ketu)
अधिपति देवता
निऋति (Nirriti)
प्रतीक
जड़ों का गुच्छा
राशि
धनु (Sagittarius)
१. मूल: अंत और आरंभ का मिलन बिंदु
मूल नक्षत्र का अर्थ है "जड़" (Root)। यह धनु राशि के प्रथम १३ अंश २० कला तक फैला हुआ है। खगोल विज्ञान में यह नक्षत्र हमारी आकाशगंगा के **गैलेक्टिक सेंटर** की ओर इशारा करता है। यह वह स्थान है जहाँ सब कुछ नष्ट होकर फिर से जन्म लेता है।
देवी निऋति: इसके अधिपति देवता निऋति हैं, जिन्हें 'अलक्ष्मी' या विनाश की देवी भी कहा जाता है। इसका अर्थ नकारात्मक नहीं है; यह उस ऊर्जा का प्रतीक है जो सड़े-गले विचारों और पुरानी जंजीरों को तोड़कर आत्मा को मुक्त करती है। मूल जातक कभी भी ऊपरी सतह पर नहीं रुकते, वे जड़ तक जाते हैं।
गण्डमूल और तांत्रिक शक्ति: मूल एक अत्यंत शक्तिशाली गण्डमूल नक्षत्र है। यहाँ जातक का जीवन संघर्षमय हो सकता है, लेकिन यह संघर्ष उसे आध्यात्मिक ऊंचाइयों पर ले जाता है। इनमें छिपी हुई शक्तियों को जगाने की असीम क्षमता होती है।
॥ चारों चरणों का तांत्रिक विश्लेषण ॥
प्रथम चरण (मेष नवांश)
स्वामी: मंगल | शक्ति: प्रचंड ऊर्जा
यह चरण सबसे अधिक शक्तिशाली और कभी-कभी विनाशकारी हो सकता है। जातक में अदम्य साहस होता है और वह पुरानी व्यवस्था को चुनौती देने वाला होता है।
द्वितीय चरण (वृषभ नवांश)
स्वामी: शुक्र | शक्ति: भौतिक स्थायित्व
यहाँ जातक अपनी जड़ों को मज़बूत करता है। जातक धन संचय और परिवार की विरासत को संभालने में सफल होता है, लेकिन स्वभाव थोड़ा जिद्दी हो सकता है।
तृतीय चरण (मिथुन नवांश)
स्वामी: बुध | शक्ति: बौद्धिक अन्वेषण
जातक महान शोधकर्ता, लेखक और दार्शनिक होता है। वह रहस्यों को सुलझाने और संचार के माध्यम से दुनिया को प्रभावित करने वाला होता है।
चतुर्थ चरण (कर्क नवांश)
स्वामी: चंद्रमा | शक्ति: भावनात्मक गहराई
यह चरण जातक को अध्यात्म और करुणा की ओर मोड़ता है। जातक दूसरों के कष्टों को दूर करने के लिए अपनी शक्तियों का उपयोग करता है।
३. करियर: जड़ से शिखर तक का मार्ग
शोध एवं जांच
जासूस, वैज्ञानिक, पैथोलॉजिस्ट और भूविज्ञानी (Geologists) के रूप में ये जातक सर्वश्रेष्ठ होते हैं।
आध्यात्मिक गुरु
तंत्र-मंत्र, ज्योतिष और गूढ़ रहस्यों को सिखाने वाले महान शिक्षक इसी नक्षत्र के होते हैं।
सर्जरी एवं औषधि
जटिल रोगों के मूल कारण को ढूंढकर उन्हें जड़ से मिटाने वाले डॉक्टर और वैद्य।
४. नक्षत्र वृक्ष: साल (Shorea Robusta)
मूल नक्षत्र का पवित्र वृक्ष साल है। साल का वृक्ष अपनी मज़बूती और हज़ारों वर्षों तक खड़े रहने की शक्ति के लिए जाना जाता है।
- केतु के दोषों को दूर करने के लिए साल के वृक्ष के नीचे बैठकर साधना करना अमोघ है।
- यदि जीवन में बार-बार विनाश की स्थिति बन रही हो, तो इस वृक्ष का रोपण करें।
- वास्तु अनुसार इसे घर के पश्चिम कोण में लगाना जातक को स्थिरता प्रदान करता है।
५. छाया पक्ष: जब जड़ें ही बोझ बन जाएं
मूल जातक को अपने आक्रामक स्वभाव और अकारण क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए। वे कभी-कभी "सब कुछ खत्म कर देने" की भावना से ग्रसित हो जाते हैं।
इनमें दूसरों के प्रति कठोरता और संदेह का भाव रह सकता है। इन्हें सीखना चाहिए कि सृजन के लिए हर बार विनाश की आवश्यकता नहीं होती।
॥ मूल नक्षत्र महा-उपचार ॥
🕯️ गणेश वंदना: केतु के अधिपति गणेश जी हैं, अतः गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ जातक की रक्षा करता है।
🙏 क्षमा प्रार्थना: प्रतिदिन धरती माता और अपने पितृों से अनजाने पापों की क्षमा मांगना भाग्य उदय करता है।
🟡 सात अनाजों का दान: पक्षियों को सात अनाज (सप्तधान्य) खिलाना केतु की शांति का सबसे सरल उपाय है।
🕉️ बीज मंत्र: "ॐ ह्रीं" या "ॐ मूलाय नमः" का नियमित १०८ बार जाप करें।