मृगशिरा नक्षत्र 🦌
"अनंत जिज्ञासा, शोध और सत्य की निरंतर खोज का ब्रह्मांडीय पथ"
स्वामी ग्रह
मंगल (Mars)
अधिपति देवता
सोम (Moon)
प्रतीक
हिरण का सिर
राशि
वृषभ - मिथुन
१. मृगशिरा: कस्तूरी मृग की अंतहीन तलाश
मृगशिरा नक्षत्र आकाश मंडल का पांचवां नक्षत्र है। संस्कृत में "मृग" का अर्थ हिरण और "शिरा" का अर्थ सिर होता है। खगोल विज्ञान में इसे ओरियन (Orion) तारा मंडल का हिस्सा माना जाता है, जो शिकारी के आकार का दिखता है।
अमृत का संबंध: इसके अधिपति देवता सोम (चंद्रमा) हैं, जो अमृत और औषधियों के स्वामी हैं। यही कारण है कि मृगशिरा जातक में नया सीखने और स्वयं को पुनर्जीवित करने की अद्भुत क्षमता होती है। मंगल का नक्षत्र होने के कारण इनमें खोज करने का साहस और चंद्रमा के देवता होने के कारण इनमें संवेदनशीलता का अनोखा संगम मिलता है।
॥ चारों चरणों का सूक्ष्म फल ॥
प्रथम चरण (सिंह नवांश)
राशि: वृषभ | स्वामी: सूर्य
यह चरण जातक को राजसी ठाट-बाट और कलात्मक रुचि प्रदान करता है। जातक अपनी मान-मर्यादा के प्रति बहुत सचेत होता है।
द्वितीय चरण (कन्या नवांश)
राशि: वृषभ | स्वामी: बुध
यहाँ जातक की शोध (Research) करने की शक्ति चरम पर होती है। ऐसे जातक महान लेखक या गणितज्ञ बनते हैं।
तृतीय चरण (तुला नवांश)
राशि: मिथुन | स्वामी: शुक्र
यह चरण सामाजिक संबंधों और रोमांस का है। जातक अपनी हाज़िरजवाबी से सबका दिल जीत लेता है।
चतुर्थ चरण (वृश्चिक नवांश)
राशि: मिथुन | स्वामी: मंगल
यह सबसे गुप्त और तीव्र चरण है। यहाँ जातक जासूसी, तंत्र और गहन विज्ञान में सफलता पाता है।
३. करियर एवं सफलता के क्षेत्र
शोध एवं अन्वेषण
वैज्ञानिक शोध, मार्केट एनालिसिस और जासूसी विभाग में इनका कोई सानी नहीं है।
कला एवं संगीत
ये जातक बेहतरीन कवि, गायक और वाद्य यंत्र बजाने वाले कलाकार होते हैं।
प्रकृति एवं पर्यटन
वन विभाग, वन्यजीव संरक्षण और ट्रेवल ब्लॉगर के रूप में ये सफल होते हैं।
४. नक्षत्र वृक्ष: खैर (Khadira Tree)
मृगशिरा का पवित्र आराध्य वृक्ष खैर (Khadira) है। यह वृक्ष अपनी मज़बूती और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है।
- खैर की लकड़ी का हवन मृगशिरा जातक के मंगल दोषों को शांत करता है।
- त्वचा रोगों से मुक्ति के लिए इस वृक्ष की सेवा करना अत्यंत फलदायी है।
- वास्तु अनुसार इसे दक्षिण दिशा में लगाना जीवन में स्थिरता लाता है।
॥ मृगशिरा नक्षत्र महा-उपचार ॥
🕯️ सोम साधना: सोमवार को चंद्रमा को अर्घ्य दें और शिव जी पर सफ़ेद चंदन लगायें।
🐕 मृग मुद्रा: प्रतिदिन योग में मृग मुद्रा का अभ्यास मन की चंचलता को समाप्त करता है।
🕉️ बीज मंत्र: "ॐ ह्रीं" या "ॐ मृगशिरा नक्षत्राय नमः" का १०८ बार जाप करें।
💎 रत्न विज्ञान: मंगल को बलवान करने के लिए असली इतालवी मूँगा (Red Coral) धारण करें।