॥ तापवाणी ज्योतिष ॥

सत्यम् वद धर्मम् चर

गणना जारी...

अश्लेषा नक्षत्र 🐍

"सर्प की आलिंगन शक्ति, सम्मोहन का जाल और वह तीव्रता जो अंतर्मन के रहस्यों को भेद देती है।"

स्वामी ग्रह

बुध (Mercury)

अधिपति देवता

सर्प (Nagas)

प्रतीक

कुंडलित सर्प

राशि

कर्क (Cancer)

09

१. अश्लेषा: कुंडलित शक्ति का रहस्य

अश्लेषा नक्षत्र को 'आलिंगन' (The Embrace) का नक्षत्र कहा जाता है। इसका प्रतीक एक कुंडली मारे हुए सांप की तरह है, जो सुरक्षा और जकड़न दोनों का बोध कराता है।

नागों का प्रभाव: इसके देवता नाग हैं, जो पाताल लोक के स्वामी और गुप्त ज्ञान के रक्षक हैं। अश्लेषा जातक में किसी भी चीज़ की गहराई तक जाने और छिपे हुए सत्यों को खोजने की अद्भुत क्षमता होती है।

॥ अश्लेषा के चार चरणों का फल ॥

प्रथम चरण (धनु नवांश)

यहाँ जातक बहुत विद्वान और दार्शनिक होता है। वह अपनी बुद्धि का प्रयोग बड़े उद्देश्यों के लिए करता है।

द्वितीय चरण (मकर नवांश)

यह चरण जातक को व्यावसायिक बनाता है। जातक अपनी योजनाओं को गुप्त रखकर सफलता पाता है।

तृतीय चरण (कुंभ नवांश)

जातक विज्ञान, तकनीक और शोध (Research) में बहुत आगे रहता है।

चतुर्थ चरण (मीन नवांश)

यहाँ जातक की ऊर्जा शांत होती है। वह आध्यात्मिकता और सेवा की ओर मुड़ता है।

३. करियर: बुध की तीक्ष्ण बुद्धि

जासूसी एवं गुप्तचर

ये बेहतरीन जासूस और साइबर एक्सपर्ट बनते हैं।

फार्मेसी एवं ड्रग्स

सर्पों का संबंध विष और औषधि दोनों से है, अतः ये महान फार्मासिस्ट बनते हैं।

रणनीति एवं कूटनीति

राजनीति और कूटनीति में अपनी चालों से दुश्मनों को पस्त करते हैं।

४. नक्षत्र वृक्ष: नागकेशर

इस वृक्ष को लगाने से कालसर्प दोष की शांति होती है। बुधवार के दिन इसकी पूजा बौद्धिक शक्ति बढ़ाती है।

॥ अश्लेषा महा-निवारण उपाय ॥

🐍 नाग पूजा: नाग पंचमी या हर बुधवार को नाग देव की पूजा और दूध अर्पित करना शुभ है।

🕉️ बीज मंत्र: "ॐ अश्लेषा नक्षत्राय नमः" का १०८ बार जाप करें।