आज का पंचांग

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aaj-ka-panchang🔱 आज का पंचांग: काल की गणना और आपके जीवन पर इसका प्रभाव

वैदिक परंपरा में समय को केवल घंटों और मिनटों में नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय कंपन (Cosmic Vibrations) के रूप में देखा जाता है। Tapvaani द्वारा प्रस्तुत आज का पंचांग आपको प्रकृति की उन्हीं अदृश्य शक्तियों से तालमेल बिठाने में मदद करता है।


🔱 आज का विस्तृत वैदिक पंचांग

📅 10 February 2026 | 📍 Dhanbad, Jharkhand

1. पंचांग के 5 मुख्य अंग (Panchang Details)

तिथि (Tithi): Navami (K) कृष्ण पक्ष

तिथि चंद्रमा के चरणों पर आधारित गणना है। यह शुभ कार्यों के चयन के लिए सबसे महत्वपूर्ण अंग माना जाता है।

नक्षत्र (Nakshatra): Anuradha

चंद्रमा जिस तारा समूह से गुजरता है उसे नक्षत्र कहते हैं। नक्षत्र से व्यक्ति के स्वभाव का पता चलता है।

योग (Yoga): Dhruva

सूर्य और चंद्रमा की दूरी के योग से बनने वाली स्थिति को योग कहते हैं। यह कार्यों की सफलता सुनिश्चित करता है।

करण (Karana): Kaulava

एक तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं। यह कार्यों की स्थिरता और परिणाम को दर्शाता है।

वार (Day): मंगलवार

आज का दिन मंगलवार है।

🔱 मंगलवार: मंगल देव एवं संकटमोचन हनुमान जी का तेज

🧠 ज्योतिषीय तर्क (Cosmic Logic): मंगल ऊर्जा, साहस और भूमि का कारक है। आज की ऊर्जा आपके पराक्रम और रक्त संचार को नियंत्रित करती है।

🧘 सिद्ध बीज मंत्र: आज आपको "ॐ अं अंगारकाय नमः (मंगल बीज मंत्र) अथवा ॐ हं हनुमते नमः" का कम से कम १०८ बार जाप करना चाहिए।

🎨 रंग चिकित्सा (Color Therapy): आज सिंदूरी लाल या गहरा नारंगी (यह आपके शरीर में स्फूर्ति और साहस का संचार करेगा) का प्रयोग आपके व्यक्तित्व को निखारेगा।

🌾 कर्म शुद्धि एवं दान: ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए आज लाल मसूर की दाल, गुड़, तांबे के बर्तन, या लाल वस्त्र किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को दें।

💡 आज की 'विशेष सफलता टिप': आज के दिन उधार (कर्ज) लेन-देन से बचें, वरना चुकाना मुश्किल हो सकता है। क्रोध पर नियंत्रण रखें और हनुमान चालीसा का सस्वर पाठ करें।

2. खगोलीय स्थिति (Planetary Status)

सूर्य राशि (Sun Sign) मकर

सूर्य वर्तमान में मकर राशि में गोचर कर रहे हैं।

चंद्र राशि (Moon Sign) वृश्चिक

आज चंद्रमा वृश्चिक राशि में विराजमान हैं।

3. आपके स्थान (Dhanbad) के सूर्योदय अनुसार शुभ (Muhurat) एवं अशुभ समय

✅ शुभ मुहूर्त (स्थानीय) अभिजीत मुहूर्त: 11:34 AM - 12:22 PM

आपके स्थान (Dhanbad) के सूर्योदय अनुसार।

🛑 अशुभ समय (स्थानीय) राहुकाल: 02:48 PM - 04:12 PM

इस समय में शुभ कार्य वर्जित हैं।

🌙 आज की चंद्र कला (Moon Phase)

कृष्ण पक्ष (Waning)
चंद्र प्रकाश: 50%

चंद्रमा आज अमावस्या की ओर अग्रसर है।

🌅 सूर्योदय: 06:19 AM
🌇 सूर्यास्त: 05:37 PM
🔱 आगामी खगोलीय गणना (डिग्री आधारित): 🌕 अगली पूर्णिमा: 03 March 2026 🌑 अगली अमावस्या: 17 February 2026

⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer):

यह पंचांग और फलादेश प्राचीन वैदिक सूत्रों और AI गणनाओं पर आधारित है। ज्योतिष एक संभावनाओं का विज्ञान है। Tapvaani.com किसी भी जानकारी की पूर्ण सटीकता की गारंटी नहीं लेता है। किसी भी बड़े निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। इस जानकारी के उपयोग से होने वाले किसी भी परिणाम के लिए Tapvaani.com जिम्मेदार नहीं होगी।

 

📊 पंचांग के ५ स्तंभ: एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण

ज्योतिष शास्त्र में पंचांग के पांच अंगों को ‘पंच-तत्वों’ का प्रतिनिधि माना जाता है। यहाँ उनका विस्तृत और अनूठा विवरण है:

  1. तिथि (जल तत्व): तिथि चंद्रमा की स्थिति को दर्शाती है और हमारे भावनात्मक स्वास्थ्य को नियंत्रित करती है। शुक्ल पक्ष की तिथियाँ वृद्धि और कृष्ण पक्ष की तिथियाँ आंतरिक शुद्धि का प्रतीक हैं। 🌑

  2. नक्षत्र (वायु तत्व): यह पंचांग का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, वह हमारे मस्तिष्क के विचारों की दिशा तय करता है। नक्षत्रों के स्वामी ग्रह आज आपकी सफलता की कुंजी हैं। ✨

  3. योग (आकाश तत्व): योग सूर्य और चंद्रमा के बीच के कोणीय मिलन को कहते हैं। यह आपके स्वास्थ्य और ऊर्जा के स्तर को प्रभावित करता है। ‘सिद्धि’ या ‘वृद्धि’ जैसे योग अमृत के समान होते हैं। 🌀

  4. करण (पृथ्वी तत्व): करण तिथि के आधे भाग को कहते हैं। यह भौतिक कार्यों, जैसे व्यापार और संपत्ति के लेन-देन में आपकी स्थिरता को सुनिश्चित करता है। ⚖️

  5. वार (अग्नि तत्व): सात वार सात प्रमुख ग्रहों की शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं। वार का स्वामी ग्रह यह तय करता है कि आज के दिन किस देवता की उपासना आपको फल देगी। 📅


🛑 समय का चक्र: शुभ मुहूर्त बनाम वर्जित काल

समय कभी भी पूरी तरह बुरा नहीं होता, वह केवल विशिष्ट कार्यों के लिए अनुपयुक्त होता है।

  • अभिजीत मुहूर्त (The Golden Hour): प्रतिदिन दोपहर के समय आने वाला यह मुहूर्त भगवान विष्णु का चक्र है, जो सभी दोषों को काट देता है। यदि आपको पंचांग देखना न आता हो, तो भी इस समय में किया गया कार्य शुभ फल देता है।

  • राहुकाल (The Shadow Period): यह समय अमृत में विष के समान माना गया है। राहुकाल के दौरान नई शुरुआत करने से मानसिक भ्रम और कार्यों में अड़चनें पैदा होती हैं।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले ज्योतिषीय प्रश्न (FAQ) — आपके संशय, हमारे उत्तर

प्रश्न 1: 📍 पंचांग में ‘स्थान’ (Location) का इतना महत्व क्यों है? उत्तर: ज्योतिष पूरी तरह से खगोल विज्ञान और भूगोल पर आधारित है। पृथ्वी के घूमने के कारण सूर्योदय का समय धनबाद, दिल्ली या न्यूयॉर्क में अलग-अलग होता है। चूंकि पंचांग की गणना सूर्योदय से शुरू होती है, इसलिए स्थान बदलते ही शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय भी बदल जाता है।

Tapvaani Special: हमारी AI-Trace तकनीक आपकी सटीक लोकेशन को ऑटोमैटिक पहचान कर आपको आपके शहर का एकदम सही ‘लोकल टाइम’ दिखाती है।


प्रश्न 2: 🕉️ क्या पंचांग देखना केवल पंडितों या ब्राह्मणों के लिए जरूरी है? उत्तर: बिल्कुल नहीं! यह एक बहुत बड़ी भ्रांति है। जिस तरह हम घर से निकलने से पहले Weather Report (मौसम विभाग की जानकारी) देखते हैं ताकि बारिश से बच सकें, ठीक वैसे ही पंचांग ‘काल का मौसम विज्ञान’ है।

हर जागरूक व्यक्ति, चाहे वह बिजनेसमैन हो, छात्र हो या गृहणी, पंचांग देखकर अपने दिन की योजना बना सकता है ताकि उसे कम मेहनत में ग्रहों का पूरा सहयोग और सफलता मिल सके।


प्रश्न 3: 🌌 नक्षत्र और राशि में क्या मूलभूत अंतर है? उत्तर: इसे एक उदाहरण से समझें— ‘राशि’ एक बड़ा शहर है, तो ‘नक्षत्र’ उस शहर के अंदर का एक विशिष्ट मोहल्ला या घर है।

  • ज्योतिष में एक राशि 30 डिग्री की होती है, जबकि एक नक्षत्र केवल 13.20 डिग्री का होता है।

  • राशि आपको सामान्य जानकारी देती है, लेकिन नक्षत्र आपके स्वभाव और भविष्य का अत्यंत सूक्ष्म और सटीक फलादेश (Detailed Prediction) देता है।


प्रश्न 4: 🛑 राहुकाल में काम बिगड़ने का डर क्यों रहता है? उत्तर: राहुकाल को ज्योतिष में ‘अमृत में विष’ के समान माना गया है। वैज्ञानिक रूप से देखें तो इस समय के दौरान ब्रह्मांडीय ऊर्जा में एक प्रकार का विक्षेप (Disturbance) होता है, जो हमारे निर्णय लेने की क्षमता (Decision Making) को धुंधला कर देता है। इसीलिए इस समय में किए गए बड़े निवेश या नई शुरुआत अक्सर गलत फैसलों का शिकार हो जाती है।


प्रश्न 5: ✨ अभिजीत मुहूर्त को ‘सर्वश्रेष्ठ’ क्यों माना जाता है? उत्तर: पौराणिक कथाओं के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र का प्रतिनिधित्व करता है। यह प्रतिदिन दोपहर के समय (सूर्योदय और सूर्यास्त के ठीक बीच में) आता है। इस समय में आकाश मंडल के लगभग सभी दोष शांत हो जाते हैं। यदि आपको कोई शुभ मुहूर्त न मिल रहा हो, तो आप बेझिझक इस समय में अपना कार्य शुरू कर सकते हैं। ⚔️


प्रश्न 6: 📱 क्या ऑनलाइन पंचांग उतना ही सटीक है जितना पुरानी पोथी? उत्तर: विज्ञान और धर्म जब मिलते हैं, तो सटीकता और बढ़ जाती है। पुरानी पोथियों के सूत्र वही हैं, लेकिन Tapvaani का डिजिटल इंजन उन सूत्रों को बिना किसी मानवीय गलती (Manual Calculation Error) के मिलीसेकंड में कैलकुलेट करता है। यह किसी भी कागजी पंचांग से अधिक सटीक और ‘Real-time’ अपडेटेड है। 🚀